परिभाषा
फ़ुल टैंक से फ़ुल टैंक माइलेज दो फ़ुल टैंक फ़िल के बीच चली दूरी को पहले फ़ुल टैंक के बाद, दूसरे समेत, भरे सारे लीटर से भाग देना है। यह टैंक में पहले से बचे डीज़ल को नहीं, सिर्फ़ ख़रीदे डीज़ल को गिनता है।
फ़ुल टैंक के बीच माइलेज क्यों नापें?
क्योंकि टैंक का स्तर तभी पक्का पता होता है जब वह फ़ुल हो। दो फ़ुल टैंक के बीच जला हर लीटर ख़रीदा हुआ है, इसलिए किमी को ख़रीदे लीटर से भाग देना ही असली माइलेज है। फ़िल-दर-फ़िल नापने में टैंक में बचा डीज़ल मिल जाता है और आँकड़ा बहुत झूलता है, जिससे असली नुक़सान छिप जाता है।
क्या एक उदाहरण दिखा सकते हैं?
एक टिपर 12,000 किमी पर फ़ुल किया जाता है। 12,350 किमी पर 80 लीटर (फ़ुल नहीं) और 12,900 किमी पर 160 लीटर से फिर फ़ुल। दूरी 900 किमी और पहले फ़ुल टैंक के बाद के लीटर 240 हैं, तो माइलेज 3.75 किमी/लीटर।
- दूरी: 12,900 − 12,000 = 900 किमी
- लीटर: 80 + 160 = 240 (पहला फ़ुल फ़िल नहीं गिना जाता)
- माइलेज: 900 ÷ 240 = 3.75 किमी/लीटर
- उम्मीद 4.20 किमी/लीटर; 10% कम यानी 3.78 किमी/लीटर, तो यह फ़िल “कम” के निशान वाला है।
डीज़ल माइलेज कम क्यों होता है?
कम माइलेज की ईमानदार वजहें भी होती हैं और बेईमान भी। भारी लोड, पहाड़ या घाट की सड़क, लंबी आइडलिंग, कम टायर प्रेशर, बंद एयर फ़िल्टर या इंजेक्टर की दिक़्क़त ईमानदार वजहें हैं। टैंक से डीज़ल निकालना या बिल बनवाकर डीज़ल न डालना बेईमान वजहें हैं। पहले गाड़ी जाँचें, फिर ड्राइवर के हिसाब से पैटर्न देखें।
- एक ही गाड़ी, अलग ड्राइवर: ड्राइवर के हिसाब से माइलेज मिलाएँ।
- कम किमी के अंतर पर पास-पास फ़िल देखने लायक़ हैं।
- GPS पर गाड़ी खड़ी हो और डीज़ल ख़रीदा जाए, तो यह गंभीर चेतावनी है।
सॉफ़्टवेयर माइलेज ट्रैक करने में कैसे मदद करता है?
सॉफ़्टवेयर हर फ़िल ओडोमीटर और फ़ोटो के साथ दर्ज करता है, जाँचता है कि ओडोमीटर पिछली बार से ज़्यादा है, फ़ुल टैंक माइलेज अपने-आप निकालता है और गाड़ी की उम्मीद से 10% से ज़्यादा कम फ़िल पर निशान लगाता है। रिपोर्ट गाड़ी और ड्राइवर के हिसाब से संदिग्ध एंट्री दिखाती है, ताकि एक बुरा दिन नहीं, पैटर्न दिखे।
FleetLite यह हर प्लान में करता है। Premium की कॉस्ट-लीक रिपोर्ट डुप्लिकेट फ़िल और GPS के साथ खड़ी गाड़ी में ख़रीदा डीज़ल भी जोड़ती है।
फ़ुल टैंक के बीच डीज़ल माइलेज कैसे नापें
टैंक फ़ुल करें
टैंक फ़ुल करवाएँ और ओडोमीटर रीडिंग लिखें। यहीं से माप शुरू होता है।
हर टॉप-अप दर्ज करें
हर अधूरे फ़िल के लीटर और ओडोमीटर लिखें। कुछ रीसेट न करें।
फिर फ़ुल करें
अगले फ़ुल टैंक पर लीटर और ओडोमीटर लिखें। इससे माप पूरा होता है।
दूरी निकालें
दूसरे फ़ुल टैंक के ओडोमीटर से पहले वाला घटाएँ।
लीटर जोड़ें
पहले फ़ुल टैंक के बाद के सभी फ़िल के लीटर जोड़ें, दूसरे फ़ुल टैंक समेत।
भाग देकर तुलना करें
दूरी को लीटर से भाग देकर किमी प्रति लीटर निकालें और गाड़ी के उम्मीद वाले माइलेज से मिलाएँ।
सवाल-जवाब
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
टैंक कितनी बार फ़ुल करवाना चाहिए?
इतनी बार कि हर एक-दो हफ़्ते में एक माप पूरा हो। जितने ज़्यादा फ़ुल टैंक, उतनी जल्दी माइलेज की गिरावट दिखेगी।
उम्मीद वाला माइलेज कितना रखें?
गाड़ी के अपने आम रूट और लोड का इतिहास इस्तेमाल करें; नई गाड़ी निर्माता के आँकड़े से शुरू करके एक महीने बाद बदल सकती है।
क्या AdBlue या आइडलिंग से फ़र्क़ पड़ता है?
आइडलिंग में बिना किलोमीटर डीज़ल जलता है, इसलिए लंबी आइडलिंग माइलेज घटाती है। AdBlue अलग तरल है; इसे डीज़ल नहीं, अलग ख़र्च के रूप में दर्ज करें।